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लालकिले की प्राचीर से पीएम मोदी ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश, 2024 का एजेंडा सेट.? जानिए अगले 25 सालों का क्या है मोदी सरकार का प्लान..?

नई दिल्ली । 76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 83 मिनट के संबोधन को पूरे देश ने बड़ी उत्सुकता और गौरव के साथ सुना। खुशनुमा माहौल में तिरंगे के रंगों से सजी पगड़ी पहने पीएम ने देश के गुमनाम क्रांतिकारियों को नमन करते हुए 75 साल की विकास यात्रा का जिक्र किया और आगे 2047 का लक्ष्य भी सेट कर दिया। उनके भाषण में एक तरफ मेड इन इंडिया तोप की सलामी का गौरव झलक रहा था तो वहीं महिलाओं के अपमान का जिक्र करते हुए उनका गला भर आया। उन्होंने अगले 25 वर्षों में विकसित भारत, गुलामी की सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता के साथ ही नागरिकों के अपने कर्तव्य पालन के ‘पंच प्रण’ का आह्वान भी किया। उनके भाषण को अगर आपने गौर से सुना होगा तो आपको याद होगा कि उन्होंने एक निर्णायक जंग छेड़ने का भी ऐलान किया है। जी हां, ये जंग है भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ। पीएम के भाषण के इस हिस्से की चर्चा काफी ज्यादा है। दरअसल, पीएम मोदी ने जिस अंदाज में देशवासियों का समर्थन मांगा है उससे कई तरह के संकेत मिल रहे हैं।

भ्रष्टाचार पर पीएम की दो टूक
प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के खिलाफ नफरत का भाव पैदा नहीं होता है या सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक यह मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है। उन्होंने इसे अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी बताते हुए इस लड़ाई में देशवासियों का सपोर्ट भी मांगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों विकृतियों का अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया तो यह विकराल रूप ले सकती हैं। कई लोगों को जेलों में जीने के लिए मजबूर करके रखा हुआ है। हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटना पड़े, वह स्थिति हम पैदा करेंगे। वे अब बच नहीं पाएंगे… इस मिजाज के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में हिंदुस्तान कदम रख रहा है।
पीएम मोदी, लालकिले की प्राचीर से

वो चुभने वाली बात
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, तब यह देखने को मिलता है कि एक तरफ वे लोग हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है और दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिनके पास अपना चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है। पीएम ने कहा कि यह स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना होगा।

भ्रष्टाचार पर अब तक क्या-क्या हुआ
पीएम ने आगे के लिए सख्त ऐक्शन का संकेत देते हुए अपनी सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 8 वर्षों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (यानी सीधे लाभार्थी के खाते में पैसा पहुंचने की स्कीम) का उपयोग करते हुए 20 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाया गया और उसे देश की भलाई के काम में लगाने में सरकार सफल हुई। इतना ही नहीं, जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूट कर भाग गए थे, उनकी संपत्तियां जब्त करके वापस लाने की कोशिशें जारी हैं।

वे अब बच नही पाएंगे…
मोदी ने कहा, ‘कई लोगों को जेलों में जीने के लिए मजबूर करके रखा हुआ है, हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटना पड़े, वह स्थिति हम पैदा करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘वे अब बच नहीं पाएंगे…इस मिजाज के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में हिंदुस्तान कदम रख रहा है।’

तो क्या करने वाले हैं मोदी?
प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है और उन्हें इसके खिलाफ लड़ाई तेज करनी है और इसे निर्णायक मोड़ पर लेकर जाना ही है। उन्होंने कहा, ‘मेरे 130 करोड़ देशवासी, आप मुझे आशीर्वाद दीजिए, आप मेरा साथ दीजिए, मैं आज आपसे साथ मांगने आया हूं, आपका सहयोग मांगने आया हूं ताकि मैं इस लड़ाई को लड़ सकूं और इस लड़ाई को देश जीत पाए।’

मोदी ने कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ नफरत दिखती है लेकिन कभी-कभी भ्रष्टाचारियों के प्रति उदारता भी दिखाई जाती है जो किसी भी देश को शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा, ‘कई लोग तो इस हद तक चले जाते हैं कि अदालत में सजा हो चुकी हो, भ्रष्टाचार सिद्ध हो चुका हो, जेल जाना तय हो चुका हो, जेल की सजा काट रहे हों, इसके बावजूद लोग उनका महिमामंडन करने में लगे रहते हैं, उनकी शान-शौकत में लगे रहते हैं, उनकी प्रतिष्ठा बनाने में लगे रहते हैं।’ उन्होंने कहा कि जब तक समाज में गंदगी के प्रति नफरत नहीं होती है, स्वच्छता के प्रति चेतना भी नहीं जागती है। इसी तरह जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता है, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक यह मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है। इसलिए भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति भी हमें बहुत जागरूक होने की जरूरत है।

भाई-भतीजावाद और परिवारवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री ने बेबाक अंदाज में कहा कि दुर्भाग्य से राजनीति के क्षेत्र की इस बुराई ने हिंदुस्तान की हर संस्था में परिवारवाद को पोषित कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘परिवारवाद हमारी अनेक संस्थाओं को अपने में लपेटे हुए है और उसके कारण मेरे देश की प्रतिभा को नुकसान होता है। देश के सामर्थ्य का नुकसान होता है, भ्रष्टाचार का एक कारण परिवारवाद भी बन जाता है।’ उन्होंने कहा कि जब तक इसके खिलाफ नफरत पैदा नहीं होगी तब तक हम संस्थाओं को नहीं बचा पाएंगे।

आ सकता है कोई तगड़ा कानून
वास्तव में, जिस अंदाज में पीएम ने लालकिले की प्राचीर से भ्रष्टाचार और परिवारवाद से निपटने का संकल्प दिखाया है और देशवासियों से सपोर्ट मांगा, उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही मोदी सरकार कोई सख्त कानून की तरफ बढ़ सकती है। निर्णायक जंग की बात ऐसे समय में की गई है जब कई विपक्षी नेता भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे हैं। कुछ के खिलाफ केस चल रहा है, कुछ जेल में हैं और कुछ के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में पीएम की ओर से भ्रष्टाचारियों का सपोर्ट न करने की अपील दरअसल, जनता से संभावित ऐक्शन पर सपोर्ट हासिल करना लगता है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले महीनों में परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर फुल स्टॉप लगाने के लिए सख्त एंटी करप्शन लॉ जैसा कानून या मसौदा लाया जाए। हो सकता है हाईलेवल कमेटी बनाई जा सकती है जो राजनीति में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए रूपरेखा तैयार करे और उसे संसद के जरिए कानूनी जामा पहनाया जाए।

नोटों का पहाड़ देख जनता गुस्से में
वैसे, आम जनता का नजरिया भ्रष्टाचारियों के प्रति निगेटिव ही रहता है। पीएम का इशारा भी उन चंद लोगों के लिए था, जो केवल अपने नेता का सपोर्ट करने के लिए भ्रष्टाचार के सामने आंख मूंद लेते हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की शुरुआत से ही भ्रष्टाचार पर अंकुश प्राथमिकता में रहा है। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे मामलों में सरकार ने सख्त रुख दिखाया है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कार्रवाई जनता देख ही रही है। बंगाल में नोटों का पहाड़ वाली तस्वीरें देख जनता में गुस्सा बढ़ा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में पिछले कुछ वर्षों में सख्ती देखी गई है। भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार एजेंसियों को मिल चुका है। ब्लैक मनी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। नोटबंदी भी एक बड़ा फैसला था।

सोनिया-राहुल की तरफ इशारा?
इन सबके बीच, शायद पीएम मोदी का इशारा कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की तरफ था। दरअसल, जब ईडी ने कांग्रेस के दोनों दिग्गज नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाया तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर आ गए। पूरे देश में प्रदर्शन किए गए। महाराष्ट्र में देखें तो शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत जमीन घोटाले में गिरफ्तार हैं। बंगाल में पार्थ चटर्जी समेत कई बड़े नेता जेल में हैं। उधर, चारा घाटाले में सजा पाए हुए लालू प्रसाद यादव जमानत पर बाहर आए तो बिहार में उनके प्रति समर्थन एक बार फिर बढ़ता दिखा। उन्हें एक बड़े नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश हो रही है। हाल में जेडीयू ने भाजपा का साथ तोड़कर लालू की पार्टी आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बना ली। जबकि एक समय तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगने के बाद नीतीश कुमार ने नाता तोड़ लिया था और वापस कभी न जाने की बात कही थी।

मतलब साफ, ईडी का ऐक्शन जारी रहेगा
हाल में जब विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होने लगी तो ईडी को बदनाम किया जाने लगा। आज पीएम के दो टूक अंदाज से साफ है कि आगे इस तरह के ऐक्शन कम नहीं, बढ़ने वाले हैं। इतना ही नहीं, 2 साल बाद 2024 के चुनाव में उतरने से पहले पीएम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ दृढ़ निश्चय दिखाकर एक बड़ा संदेश भी दे दिया है। वैसे भी, भ्रष्टाचार की बात से कांग्रेस ही नहीं कई क्षेत्रीय पार्टियों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

राजनीति का शुद्धिकरण होगा!
परिवारवाद पर मोदी के बरसने की अपनी वजह है। कई क्षेत्रीय दल अपने परिवार के लोगों के साथ मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाते हैं। उनके भीतर परिवार का हित ज्यादा दिखता है। पीएम अपनी चुनावी रैलियों में सपा, बसपा, कांग्रेस समेत कई पार्टियों पर वंशवादी राजनीति को लेकर घेरते आए हैं। आज उन्होंने एक बार फिर कहा कि राजनीति में परिवारवाद, परिवार की भलाई के लिए होता है और उसे देश की भलाई से कोई लेना देना नहीं होता। मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि हिंदुस्तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए और सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए भी, परिवारवादी मानसिकता से मुक्ति दिलानी होगी। योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर हमें बढ़ना होगा।

ममता ने ये क्या कह दिया?
पीएम की देशवासियों से अपील ममता बनर्जी के एक दिन पहले दिए बयान से और भी मौजू हो जाती है। टीएमसी के कई नेता भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हैं। ऐसे में ममता ने कह दिया कि अगर वे कल मेरे घर पहुंचेंगे तो आप क्या करेंगे? क्या आप सड़कों पर नहीं उतरेंगे? यह बयान एक तरह से उकसाने जैसा है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि अगर केंद्रीय एजेंसी के लोग उनके दरवाजे तक पहुंचते हैं तो वे सड़कों पर उतरें।

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